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वह उससे ग्यारह वर्ष बड़ी थी। लेकिन प्यार इस बात की परवाह नहीं करता

लड़की ने कॉलेज में लड़के का साथ दिया, जब लड़की की पीठ में समस्या हुई तो लड़के ने उसका साथ दिया। शीला जयवंत एक सच्चे प्यार की सच्ची कहानी बताती है।

वर्षों से हमारे वंश में एक अरेंज मैरिज नहीं हुई थी। बल्कि दशकों से। हमारे परिवार में भारत के सभी हिस्सों, अधिकांश समुदायों के पुरुष और महिलाएँ थीं, और अगर किसी का बॉयफ्रैंड/ गर्लफ्रैंड होते, तब भी कोई परवाह नहीं करता, जब तक कि पढ़ाई में बाधा ना आए! लेकिन मुझे ज़िलू के अफेयर पर दी गई टिप्पणियां याद हैं:

“वह बड़ी है?“

“वह उससे ग्यारह साल बड़ी है?“

उन शांत फुसफुसाहटों से क्या उत्तेजना उत्पन्न हुई। कुछ दिनों के बाद, वे अब चुप नहीं थे। वे खुले प्रश्न, बयान, राय कह-सुन रहे थे। यह चौंकाने वाला था। कोई शब्द ऐसी निंदा का वर्णन नहीं कर सकता है। बस कल्पना करें: मिस वाई ग्यारहवीं कक्षा में थी जब ज़िलू ने प्राथमिक विद्यालय में प्रवेश किया था। जब तक वह ग्यारहवीं कक्षा में पहुँचा, वह सात साल पहले से ही कमाई कर रही थी और आत्मनिर्भर थी, और उसके पास अपना एक फ्लैट था। जब उसकी मूँछ भी नहीं आई थी तब से वह उस लड़की से संगीत सीखने लगा था। कब और कैसे उन्हें प्यार हो गया, मुझसे मत पूछो, क्योंकि मैं वास्तव में नहीं जानती। मुझे बस एक बड़ा हंगामा याद है जब एक दिन किसी को ‘पता चला’। शायद किसी दखलंदाज़ आंटी या पड़ोसी को पता लगा जिसने तुरंत उसके माता-पिता को सब बक दिया, और फिर कहर टूट पड़ा।

संगीत के लैसन्स उसी पल से रुक गए थे। इससे कोई फर्क नहीं पड़ता। तथाकथित रूप से, वे उस लड़की के घर पर मिलते थे। ज़िलू को वहां जाने से मना कर दिया गया था, और चूंकि यह मोबाइल फोन से पहले के युग में था, इसलिए हममें से एक को, वह जहाँ भी जाता था, उसका पीछा करना पड़ता था, यह सुनिश्चित करने के लिए कि वह नियम न तोड़े। लेकिन कहते हैं ना कि प्यार रास्ता ढूँढ ही लेता है। और संस्कृत में एक कहावत है कि जब कोई प्यार में होता है, तो व्यक्ति न डरता है न कोई शर्म महसूस करता है। यह इतनी पुरानी भावना है कि बहुत पहले से ही हमारे पूर्वजों को इसके बारे में सब कुछ पता था।

ज़िलू और उसकी गर्लफ्रैंड के लिए हम जेसे एस्कोर्टस को धोखा देना मुश्किल नहीं था। हम फिल्मों में उनके साथ जाने लगे। जब हम फैण्टम पर सम्मोहित हो रहे थे क्योंकि उसने फिर से हमला किया, तब वे वातानुकूलित सुकून में कडल कर रहे थे। हमने जाइंट व्हील सवारी का आनंद लिया, वे गले लगाने और चिपकने के लिए दूर चले गए। हम उसके फ्लेट के कोने पर खड़े ऑरेंज आइसक्रीम खाते रहे, और कॉमिक्स पढ़ते रहे, जब वे एक-दूसरे को चिढ़ा रहे थे और खिलखिला रहे थे। दिवाली या किसी भी अन्य त्यौहार पर, ज़िलू की गर्लफ्रैंड हम सभी को बधाई देने के लिए घर पर आती थी। वह अजीब चुप्पी, गलों का खखारना, मिठाई और आकर्षक उपहारों की शर्मिंदा पेशकश, यह सब एक नाटक था।

चूंकि, बचपन से, हम सभी को सिखाया गया था कि ठीक से पढ़ाई करें वर्ना हमें नौकरी नहीं मिलेगी, ज़िलू को उसके साथ मोहब्बत करने के अलावा कुछ और भी करना था। और वह, बड़ी और बुद्धिमान होने के नाते, निश्चित रूप से अच्छी समझ का उपयोग करती थी और जोर देती थी कि वह शादी पर विचार करने से पहले कमाई करना शुरू कर दे और सैटल हो जाए। इन दो शब्दों, ‘सैटल होने’ के हमारे परिवार में अलग-अलग अर्थ थे, और जब उस लड़की की इस स्थिति का उल्लेख किया गया तो वहाँ मुँह दबाकर हँसने वाले लोग थे।

उन्हें ‘पकड़े जाने’ के दस साल बाद, उन्होंने आखिरकार रजिस्टर पर हस्ताक्षर किए। उस लड़की ने ज़िलू के कॉलेज के वर्षों के दौरान, उसके प्रारंभिक करियर के दौरान उसका इंतजार किया और उसका साथ दिया। कुछ ने कहा कि वह अब बहुत बूढ़ी थी। कुछ ने कहा कि यह नहीं टिकेगा। ज्यादातर ने कहा कि औचित्य क्या था? वह लगभग 30 वर्ष का था और वह अपने प्रसव वाले वर्षों के अंतिम किनारे पर थी। लेकिन उन्होंने शादी कर ली। वे एक-दूसरे के जीवन का इतना हिस्सा बन गए थे कि वे अविभाज्य थे। वे केवल एक फ्लैट से दूसरे में चले गए, इतनी आसानी से जैसे कि इस्तेमाल किए गए मोजे को दुबारा पहना जाता है।

रिश्ते बनाना मुश्किल है, उन्हें बनाए रखना और भी मुश्किल

उनकी कोई संतान नहीं थी। हम कज़िन्स, और हमारी संतानों पर, स्नेह बरसाया जाता था। उनका घर हमारे लिए हमेशा खुला रहता था। कठिन समय में, वे हमारी चट्टान थे। अच्छे समय में, हमारी खुशी के भागीदार।

जैसे-जैसे वे वृद्ध होते गए, वह झुक गई, और लंगड़ाने लगी क्योंकि उसके जोड़ों ने जवाब दे दिया और वह उसकी चट्टान, उसकी छड़ी, उसकी ऊर्जा, उसका सबकुछ था। वह वास्तव में उसका राजकुमार था, हमेशा आकर्षक, हमेशा चौकस, हमेशा बहादुर। उसकी झुर्रियों के साथ, वह उसे देखकर मुस्कुराती थी, और वह भी वापस मुस्कराता था। प्रत्येक गर्मी में, वह एक हिल स्टेशन पर उसके लिए छुट्टियां प्रायोजित करती थी। कभी-कभी उन्होंने हममें से कुछ कज़िन्स को भी साथ में लिया था। लड़की के रिटायर होने के बाद, वह उसे एक अद्भुत, महीने-भर लंबी छुट्टी के लिए ले गया। ज़िलू के रिटायर होने में अभी बहुत साल थे। वह घर पर गर्व से रहती थी और जब वह काम से लौटकर आता तो उसे कभी ताजा पका हुआ भोजन देने से नहीं चूकती थी। भक्ति भाव? आप इसे उनके हाव-भाव में देख सकते हैं।

मुझे पता नहीं है कि किस बीमारी से, लेकिन लड़की की मृत्यु हो गई जब वह अभी 60 की भी नहीं हुई थी। वह चली गयी, चली गयी। और ज़िलू बेसूध हो गया था। वह हमेशा उसे देखता था। ज़िलू को उसके मार्गदर्शक हाथ, आरामदायक शब्दों, उसकी उपस्थिति की आवश्यकता थी। एक साल के भीतर, बेहद पीड़ा, एक अस्पष्ट दुःख से अभिभूत होकर, वह भी चल बसा। आयु अंतर को निंदित किया जाना चाहिए, लेकिन वे दोनों एक-दूसरे के लिए बने थे। वे जहां भी होंगे, एकसाथ होंगे। वह निश्चित है।

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