वह युवा पुरूष जिसे मैं मना नहीं कर सकी

(जैसा शीतल चौधरी को बताया गया)

उसने दिखाया कि वह मुझमें रूचि रखता था, लेकिन….

वह मेरे कार्यालय में आया। कानून फर्म में एक वरिष्ठ वकील होने के नाते, मेरे पास एक केबिन था, जबकि सभी प्रोबेश्नर्स और युवा वकील हॉल स्पेस में बैठते थे। मैं अपने केबिन का दरवाज़ा खुला रखा करती थी, क्योंकि हमेशा कोई ना कोई फाइल चाहिए होती थी या रेफरेंस की ज़रूरत पड़ती थी। मैं जिस ब्रीफ पर ध्यान दे रही थी, उसपर से नज़रें हटने पर मैंने देखा की दो सुंदर भूरी आँखें खुलेआम मेरा मूल्यांकन कर रही हैं।

“हां,”

पकड़े जाने पर भी उसे कोई अफसोस नहीं था। “मैम, मुझे ‘सुनीता पाल’ मामले की कल की सुनवाई के लिए कागज़ात लाने के लिए भेजा गया है।”

इस सब के दौरान, उसकी नज़रें एक बार के लिए भी डगमगाई नहीं। मैं अपनी कुर्सी पर कसमसा गई। आँखें मुझे छोड़ ही नहीं रही थी, लेकिन मुझे ताके जाने की आदत नहीं थी। मैंने अपने करियर में इस चरण तक पहुंचने के लिए कड़ी मेहनत की थी, और 37 साल की परिपक्व उम्र में, मैं एक युवा अपस्टार्ट को खुद को नष्ट नहीं करने दूंगी।

“तुम्हारा नाम क्या है, यंग मैन?”

“अर्जुन,” उसने आदर सहित उत्तर दिया।

“ठीक है अर्जुन, मैंने देख लिया है कि तुमने कागज़ात ले लिए हैं। क्या और कुछ काम है?”

“नहीं, मैम।”

मैं लगभग निराश हो गई थी। लेकिन मैंने उसे जाने दियाः जैसे कि मैंने जिम में अपने वर्षों को जाने दिया। मुझे एक गार्ड की प्रतिष्ठा प्राप्त थी, जिसमें युवा प्रोबेशनर्स को झाड़ना, कलीग्स के साथ नेटवर्किंग करना, ग्राहकों को आकर्षित करना और शून्य सामाजिक जीवन शामिल था।

वह दिखता रहा और मैं उसे ढूंढती रही

उस दिन के बाद, वह नियमित रूप से मेरे केबिन में दिखाई देता था या गलियारों में मुझसे टकरा जाया करता था। मुझे ग्रीट करके आगे बढ़ जाता था।

लगभग महीना भर गुज़र गया। मैं हर रोज़ उससे मिलने का इंतज़ार किया करती थी। यह एक रिवाज़ की तरह था। फिर एक दिन, मुझे वह नहीं दिखा। इस बात ने मुझे परेशान कर दिया। अगले दिन मैं उसकी सीट के पास जा पहुंची। मैंने कैसुअली पूछा, “अर्जुन नहीं आया आज?”

वह दिखता रहा और मैं उसे ढूंढती रही
वह दिखता रहा और मैं उसे ढूंढती रही

उनमें से एक ने जवाब दिया, “मैम, वह इस हफ्ते छुट्टी पर है। वह घर गया है।”

मैंने सिर हिलाया और अपने केबिन में चली गई। कुछ खालीपन सा लगा। यह वही लगभग 25 वर्षीय नौजवान था जिसके बारे में मुझे उसके नाम के सिवा और कुछ नहीं पता था, और वह मेरी भावनाओं को प्रभावित करने में कामयाब हो गया था।

एक सप्ताह बीत गया और मैं उसकी अनुपस्थिति की आदी हो गई। अगले सोमवार, वह मेरे केबिन के दरवाज़े पर उत्सुकता के साथ मेरा इंतज़ार कर रहा था।

“गुड मॉर्निंग मैम। मेरे कलीग ने कहा कि निधि मैम मुझे ढूंढ रही थी। कुछ काम है मैम?”

बहुत ही टैंप्टिंग

“नहीं कुछ ज़रूरी बात नहीं है अर्जुन। मैंने बस तुम्हें देखा नहीं, इसलिए पूछ लिया। घर पर सब कैसे हैं?” मैंने कैसुअल लगने की कोशिश की लेकिन कहीं से भी नहीं लग सकी।

“सब ठीक है, मैम। वृद्ध माता-पिता, कुंवारी बहन, सामान्य मध्यमवर्गीय कहानी। हालांकि, मैं आपके लिए कुछ मिठाइयां लाया हूँ। मेरी माँ ने मिठाई बनाई है, मुझे लगा आपको पसंद आएगी,” उसने स्वादिष्ट दिखने वाले बेसन के लड्डुओं का एक डिब्बा खोला।

“ओह अर्जुन, इसे देखकर तो भगवान भी ललचा जाए,” मैंने लड्डुओं को देखते हुए कहा।

“ये भगवान के लिए नहीं हैं, सिर्फ आपके लिए हैं,” उसने कहा।

मैंने उसे कठोरता से देखा, लेकिन वह मासूमियत से कह रहा था। फिर उसके होठों पर छोटी सी मुस्कान आ गई।

“अर्जुन” मैंने अपने जीवन के अनुभवों का भार उस एक शब्द में डालने की कोशिश करते हुए कहा। लेकिन मैं कामयाब नहीं हुई।

लोग जानते थे कि क्या हो रहा था

अर्जुन किसी ना किसी बहाने से मुझे रोज़ मिलता रहा, लेकिन मैंने इसे एक इनफेचुएशन समझ कर इसपर ध्यान नहीं दिया। एक दिन हमारे साप्ताहिक कार्यक्रम के तौर पर मेरे कलीग्स के साथ कुछ ड्रिंक्स पीने के बाद, मैंने उनमें से एक को यह कहते सुना, “निधि तुम्हारा दिवाना बाहर घात लगाए बैठा है।”

लोग जानते थे कि क्या हो रहा था
लोग जानते थे कि क्या हो रहा था

मैंने मुड़कर देखा तो पाया कि अर्जुन बार के बाहर खड़ा था। स्वाभाविक रूप से मैंने उसे अनदेखा कर दिया, जबकि सच तो यह है कि मैं तुरंत उससे मिलने के लिए बाहर जाना चाहती थी। हालांकि थोड़ी देर बाद वह गायब हो गया।

हमने अपने ड्रिंक्स खत्म किए और अपने-अपने घर चल दिए। मैं उबर को फोन करते-करते बार से बाहर निकली, तभी मैंने अपनी कोहनी पर किसी के हाथ का स्पर्श महसूस किया।

“अगर तुम्हें बुरा ना लगे तो आज मैं तुम्हें मेरी बाइक पर छोड़ना चाहुंगा, प्लीज़,” अर्जुन ने ऐसे आत्मविश्वास के साथ कहा जो मैंने पहले उसमें कभी नहीं देखा था।

“ओह अर्जुन, मैं उबर से चली जाउंगी,” मैंने रूक-रूक कर कहा।

“निधि, आज कैब की हड़ताल है, तुम्हें कोई टैक्सी नहीं मिलेगी। प्लीज़ मैं तुम्हें घर छोड़ देता हूँ।”

एक साथ दो चीज़ों पर ध्यान गया। उसने मुझे मेरे नाम से बुलाया था और हड़ताल की वजह से मेरे पीछे बार तक आया था।

मैं बाइक पर बैठने के लिए सहमत हो गई

मैंने स्वीकृति में सिर हिला दिया, बाइक पर बैठ गई, भगवान को शुक्रिया कहा क्योंकि मैंने पैंट पहनी थी, उसके द्वारा दिया गया हेलमेट पहना और बिज़नस डिस्ट्रिक्ट से आगे बढ़ने पर उसकी कमर पर हाथ रख दिया। उसने मुझसे मेरे घर का पता नहीं पूछा। मैं चिंतित लेकिन उत्साहित होकर सीट पर आराम से बैठ गई। एक नया चैप्टर खुल रहा था।

मेरा अवचेतन मुझे परेशान करता रहाः यह युवा अपस्टार्ट तुम्हारी पोज़िशन का फायदा उठाना चाहता है, वह अपना करियर आगे बढ़ाना चाहता है। इसके अलावा तुम्हारे पास ऐसा क्या है जो कोई 20 वर्ष की खूबसूरत जवान लड़की उसे नहीं दे सकती?

इसके अलावा तुम्हारे पास ऐसा क्या है जो कोई 20 वर्ष की खूबसूरत जवान लड़की उसे नहीं दे सकती?

मैंने आवाज़ को चुप करने की कोशिश की, लेकिन यह और तेज़ होती गई। मैंने उसकी कमर पर से हाथ हटा दिया और बाइक को पकड़ लिया।

इस पर उसने बाइक की स्पीड कम कर दी लेकिन आगे बढ़ना जारी रखा।

हम मेरे घर पहुंच गए। मेरी उम्र मुझे अपना अहसास दिला रही थी। मैं बाइक पर से उतर गई, फिर हिचकिचाती रही कि उसे अपने घर पर बुलाउं या नहीं।

रिश्ते बनाना मुश्किल है, उन्हें बनाए रखना और भी मुश्किल

उसने नौकरी बदल ली

“चिंता मत करो मैम। मैं आपके सहज होने का इंतज़ार करूंगा। आप ही वह व्यक्ति हैं जिसके साथ मैं होना चाहता हूँ। मैं पहले ही दूसरी कानूनी फर्म में आवेदन दे चुका हूँ ताकि आपकी प्रतिष्ठा पर कोई आँच ना आए। मैं जानता हूँ कि मैं कुछ ज़्यादा ही सपने देख रहा हूँ, लेकिन अगर आप कभी मुझे इस लायक समझें कि मेरे साथ कॉफी पीने बाहर जा सकें, तो मैं खुद को बहुत खुशनसीब समझूंगा।”

मैं वहीं खड़ी रही, मैंने उसे उसकी बाइक की स्पीड बढ़ाते और जाते हुए देखा। लेकिन अर्जुन मेरे ख्यालों से नहीं गया। उस दिन के बाद से मैंने नोटिस किया कि उसकी हर दिन की ग्रीटिंग्स में अंतर्निहित परवाह थी। पंद्रह दिनों बाद, उसने हमारी फर्म छोड़ दी। उस रात मुझे उसका कॉल आया, “मैम, मैं अर्जुन बोल रहा हूँ। मैंने सोचा कि चूंकि अब मैं आपकी फर्म का एम्प्लॉई नहीं हूँ इसलिए मैं आपको अब ऑफिस टाइम के बाद भी कॉल कर सकता हूँ।”

“हाँ अर्जुन, मैंने जवाब दिया, मैं नहीं जानती थी कि क्या प्रतिक्रिया दूँ।

उसने नौकरी बदल ली
उसने नौकरी बदल ली

“मैम मेरी नई नौकरी को सेलिब्रेट करने के लिए कल ‘ले बिस्त्रो’ में मेरे साथ कॉफी पीने आना।”

मैं इतने सरल से प्रस्ताव को ठुकरा नहीं सकी। “ठीक है, मैं शाम 6 बजे वहां पहुंच जाउंगी।”

यह उन कई कॉफी और डिनर्स में से पहली थी और उसके बाद हम एक दूसरे के घर में बस गए। मेरी अलमारी में उसके कपड़े हैं और कई बार सुबह में मैं अपना टॉप नहीं ढूंढ पाती क्योंकि मैं वह उसके घर पर छोड़ आई थी।

आगे क्या है?

आगे क्या होगा, यह तो वक्त ही बताएगा। हाँ, मेरे मन में चिंता है, लेकिन मैं उनसे निपटना सीख रही हूँ। बरसों तक प्राप्त उस कंडीशनिंग पर काबू पाना आसान नहीं है जो बड़ी स्त्री और युवा पुरूष के बीच संबंध को देखकर नाक-भौं सिकोड़ती है। मैं रेस्त्रां में उन नज़रों को खुद को घूरते हुए देखती हूँ जो मेरे बॉयफ्रैंड के साथ मेरी उपस्थिति पर सवाल करती हैं, या शायद यह सिर्फ मेरी कल्पना है। मुझे सामाजिक रीति-रिवाज़ों को भूलने और इस खूबसूरत रिश्ते पर फोकस करने की ज़रूरत है, क्योंकि हर बात की खोज तक तो ठीक नहीं, इस किस्से को यूंही रहने दो; उससे भी तो सौदा मुमकिन है, हमसे भी जफा हो सकती है। लेकिन अभी के लिए मैं संतुष्ट हूँ।

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