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वहीदा रहमान और गुरु दत्त की अनकही कहानी: रील या रियल

असली ज़िन्दगी सुनहरे परदे पर या उस बड़े परदे की रंगीनियां असल ज़िन्दगी में-- आखिर क्या था वहीदा रहमान और गुरु दत्त के रिश्ते का राज़? और गुरु दत्त और गीता दत्त की शादी का क्या हुआ?
Guru-Dutt-and-Waheeda-Rehman

हमारे फ़िल्मी इतिहास में कुछ फिल्में ऐसी बनी हैं जिन्होंने रील और रियल के बीच के फासले को धुंधला कर दिया है. ऐसी ही कुछ फिल्में हैं सिलसिला, मुग़ल-ए-आज़म और कागज़ के फूल.

कागज़ के फूल गुरु दत्त के निर्देशन में बनी आखिरी मगर बेमिसाल फिल्म थी, मगर वो फिल्म अपने समय से काफी आगे थी. गुरुदत्त ने इस एक फिल्म को बनाने में अपना सब कुछ झोंक दिया था. न सिर्फ आर्थिक तौर पर, बल्कि भावनात्मक तौर पर भी गुरु दत्त ने इस फिल्म में अपनी पूरी जान लगा दी थी. दिलचस्प बात ये है की गुरुदत्त की यह फिल्म उनकी असली ज़िन्दगी से काफी करीब थी.

गुरुदत्त अपनी फिल्म CID के लिए एक नए चेहरे की तलाश कर रहे थे जब उन्होंने वहीदा रहमान को हैदराबाद में देखा और बसउसे अपनी फिल्म के लिए साइन कर लिया. धीरे धीरे वहीदा गुरुदत्त की काफी प्रिय हो गयी और उनकी काफी फिल्मों की इंस्पिरेशन भी. प्यासा, कागज़ के फूल और साहिब बीवी और गुलाम जैसी असाधारण और चर्चित फिल्मों में गुरुदत्त और वहीदा रहमान ने साथ काम किया.

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