Leena Jha

Hi! I am Leena Jha, and I am a wearer of many hats. I am a mother, a wife, a daughter, a sister and a citizen of the society, and when my thoughts want to break free, I sit down to write about my experiences. Falling in love with writing came to me when I started celebrating my life. After a hectic run of trying to be the best at every role I played, I realised that there’s one role I had neglected all this while — the role of playing me. I hope to inspire you to love yourself in the same way you love others and rediscover yourself. You can also read me more, celebrating life at 40s in my blog, http://blissful40s.in/

Mine was an arranged marriage based on the man’s job rather than the man

Why she felt so alone in her arranged marriage “Companionship is something different…something that holds you…something that binds you. Being alongside each other, caring for one another without any reason, being able to speak your mind without any apprehension, understanding the unsaid words… It’s… it’s all about respecting each other and sharing a life.” A …

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क्या हुआ जब शादी के बाद मैंने अपना सरनेम नहीं बदला

शादी के बाद अपने पुराने उपनाम पर टिके रहिए और यकीन मानिये जीवन लघु कथाओं का संस्करण बन जाएगा । हर अजनबी के साथ मुलाकात, सुनाने और हंसने या खीझ दिलाने वाली एक याद बन जाएगी। आपको उनकी आँखों की हैरानी और फिर वह प्रश्न अच्छा लगेगा जो आपके साहसी कृत्य पर सवाल उठाता है …

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Arranged marriage

शादी के साथ आई ये रिवाज़ों की लिस्ट से मैं अवाक् हो गई

शादी के बाद के सच अरेंज्ड मैरिज ऊपर स्वर्ग में नहीं तय होती हैं और न ही ये दो दिलों और दो परिवारों के मिलन की कोई ख़ूबसूरत कहानी है. असल में देखा जाए तो अरेंज्ड शादी लड़के की नौकरी और लड़की के आर्थिक हालत का मेल है. और फिर बहुत धूम धाम और शानोशौकत …

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मेरी शादी लड़के से नहीं, उसकी नौकरी से हुई थी

अपनी शादी में वो इतना अकेला क्यों महसूस कर रही थी? “साथ कुछ और ही होता है. साथ आपको जकड़ता नहीं, बांधता है. आप एक दुसरे के साथ रहते हो, एक दुसरे का ख्याल करते हो और बिना किसी कारण एक दुसरे के लिए चिंतित होते हो. आप बिना कहे ही एक दुसरे के मन …

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कैसे उसकी परफेक्ट शादी उसके “मोटापे” के तानों के नीचे दबने लगी

अपने वज़न को लेकर मैंकभी फिक्रमंद नहीं थी मुझे आज भी याद है जब मेरी बेटी सत्रह साल की हुई थी, हमने एक शानदार पार्टी का आयोजन किया था. मैंने बहुत मेहनत से साड़ी यूँ पहनी की सारी चर्बी छुप जाए, फिर हल्का मेकअप किया और पार्टी के लिए मैं बिलकुल तैयार थी. “तुम्हारी माँ …

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